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शुक्रवार, 18 फ़रवरी 2011

फागुन के दोहे

1
ऐसी दौड़ी फगुनहट ढाणी चौक फलांग।
फागुन आया खेत में गये पड़ोसी जान।।


आम बौराया आँगना कोयल चढ़ी अटार।
चंग द्वार दे दादरा मौसम हुआ बहार।।


दूब फूल की गुदगुदी बतरस चढ़ी मिठास।
मुलके दादी भामरी मौसम को है आस।।


वर गेहूँ बाली सजा खड़ी फ़स़ल बारात।
सुग्गा छेड़े पी कहाँ सरसों पीली गात।।


ऋतु के मोखे सब खड़े पाने को सौगात।
मानक बाँटे छाँट कर टेसू ढाक पलाश।।


ढीठ छोरियाँ तितलियाँ रोकें राह वसंत।
धरती सब क्यारी हुई अम्बर हुआ पतंग।।


मौसम के मतदान में हुआ अराजक काम।
पतझर में घायल हुए निरे पात पैगाम।।


दबा बनारस पान को पीक दयी यौं डार।
चैत गुनगुनी दोपहर गुलमोहर कचनार।।


सजे माँडने आँगने होली के त्योहार।
बुरी बलायें जल मरें शगुन सजाए द्वार।।


मन के आँगन रच गए कुंकुम अबीर गुलाल।
लाली फागुन माह की बढ़े साल दर साल।।

सोमवार, 9 मार्च 2009

कहें तितलियाँ


(कुछ दोहे पर्व और मौसम की शान में)

कहें तितलियाँ फूल से चलो हमारे संग
रंग सजा कर पंख में खेलें आज वसंत

फूल बसंती हंस दिया बिखराया मकरंद
यहाँ वहाँ सब रच गए ढाई आखर छंद

भंवरे तंबूरा हुए मौसम हुआ बहार
कनक गुनगुनी दोपहर मन कच्चा कचनार

अबरक से जगमग हुए उत्सव वाले रंग
सब जग को भाने लगे होली के हुड़दंग

घाटी में घुलने लगा फागुन का त्यौहार
नाच गान पकवान में खुशियां अपरंपार

भोर जली होली सखी दिनभर रंग फुहार
टेसू की अठखेलियाँ पूर गईं घर द्वार

यमन देश की रात में छिड़ी बसंत बहार
चली भोर तक भैरवी फागुन के दिन चार

आएंगे अगले बरस फिर से लेकर रंग
जाते जाते कह गया भीगे नयन वसंत

-पूर्णिमा वर्मन

बुधवार, 21 जनवरी 2009

नव वर्ष अभिनंदन


नव वर्ष की शुभ कामनाएँ।

कामनाएँ जीवन का आवश्यक तत्व हैं, इन्हें भारतीय जीवन दर्शन में धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष में तीसरे सोपान पर रखा गया हैं। कामनाओं में जो 'काम' है वही हमें काम करने की प्रेरणा देता है और उसको पूरा करने का साहस भी। शुभ में शुचिता, सुंदरता और कल्याण के अनेक अर्थ छुपे हैं। कामनाएँ कमनीय हों, कल्याणकारी हों और पवित्र हों तो फिर कहना ही क्या! आज की शुभ कामनाएँ हमें अच्छे कामों में लगाएँ और जीवन को शुभ बनाएँ!
लंबे समय के बाद लौटी हूँ शायद यह सिलसिल इस बार थोड़ा बेहतर रहे।

कुछ नए दोहे प्रस्तुत हैं-

विपदा से हारा नहीं झेला उसे सहर्ष
तूफ़ानों को पार कर पहुँचा है नव वर्ष

नभ मौसम सागर सभी करें कृपा करतार
जंग और आतंक की पड़े कभी ना मार

बागों में खिलते रहें इंद्रधनुष के रंग
घर-घर में बजते रहें खुशियों वाले चंग

एक बार फिर नए साल की मंगल कामनाएँ!