सोमवार, 20 जुलाई 2009

या हबीबी!


दुबई में एक भारतीय के लिए सबसे हैरानी की बात यह है कि अक्सर अरबी लोग शाम को चार पाँच बजे मिलने पर गुड मार्निंग कहते हैं। तब समझ में नहीं आता कि अपनी होशियारी दिखाते हुए इसका उत्तर गुड ईवनिंग में दिया जाए या उनकी इज़्ज़त रखते हुए गुड मॉर्निंग कहा जाए। यह मुझे काफ़ी बाद में पता चला कि अरबी में गुड आफ्टर नून या गुड ईवनिंग के लिए शब्द नहीं हैं। वे सुबह से शाम के पाँच छे बजे तक, जब तक अँधेरा न हो जाए सबा अल ख़ैर या गुड मॉर्निंग ही कहते हैं। मिसा अल ख़ैर या गुड ईवनिंग का प्रयोग रात में ही होता है। हम भी हिन्दी में सुप्रभात और शुभरात्रि का प्रयोग काफ़ी करने लगे हैं पर दोपहर और शाम के लिए किसी अलग शब्द का प्रयोग आमतौर पर नहीं करते। यों भी हमारा नमस्ते सदाबहार है। हर समय हर किसी से कहा जा सकता है।

इसी प्रकार अरबी में एक शब्द है हबीबी। शायद दुनिया की किसी अन्य भाषा में ऐसा शब्द नहीं। हबीबी का हिन्दी अनुवाद प्रिय या मित्र हो सकता है लेकिन इस शब्द की सीमाएँ अनंत हैं। किसी से पहली बार भेंट हो तो भी उसको हबीबी कहा जा सकता है। ग्राहक दूकानदार को हबीबी कहता है और दूकानदार ग्राहक को, उम्रदराज़ महिलाएँ हर किसी को हबीबी कहती हैं और बच्चे भी ब‌ड़ों को हबीबी संबोधित करते हैं। फ़ोन पर हलो हबीबी कह देना आम बात है। अजीब तब लगता है जब अरबी लोग अँग्रेज़ी बोलते हुए उतनी ही सहजता से डियर शब्द का प्रयोग करते हैं। कुल मिलाकर यह कि अगर अरबी व्योमबाला या व्योम बालक आपको डियर कह दे तो बहुत खुश या नाराज़ होने की ज़रूरत नहीं।

19 टिप्‍पणियां:

Udan Tashtari ने कहा…

खुश ही होते मगर अब आपने उसे भी संशय में डाल दिया. :)

अच्छी जानकारी!

श्यामल सुमन ने कहा…

रोचक जानकारी दी आपने। अच्छा लगा पढ़कर।

सादर
श्यामल सुमन
09955373288
www.manoramsuman.blogspot.com
shyamalsuman@gmail.com

mehek ने कहा…

aare waah achhi jankari,sach dusre bhasha ke shabd janlena bahut achha laga.

Vidhu ने कहा…

या हबीबी .....जी आपने अच्छी जानकारी दी,उम्मीद है आप ठीक होंगी,

Dr. Smt. ajit gupta ने कहा…

यहाँ भारत में भी कुछ लोग मानते हैं कि प्रथम बार मिलने पर गुड मार्निग ही बोलना चाहिए। हबीबी शब्‍द से पहचान करायी बहुत अच्‍छा लगा और व्‍योम बाला शब्‍द बहुत पसन्‍द आया। हिन्‍दी में भी हम भाई शब्‍द का अधिकतर प्रयोग करते हैं, कई बार तो पति को भी कहते हैं कि अरे भाई ऐसा नहीं है।

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक ने कहा…

अच्छी जानकारी दी।
आभार!

creativekona ने कहा…

पूर्णिमा जी ,
आपके ब्लॉग के माध्यम से तो वहां की संस्कृति ,तीज त्योहारों के साथ ही भाषा की भी जानकारी मिल रही है .अच्छा लेख ....
हेमंत कुमार

राजीव तनेजा ने कहा…

जानकर अच्छा लगा

डॉ. मनोज मिश्र ने कहा…

नई जानकारी मिली,आभार.

‘नज़र’ ने कहा…

हबीब मानी दोस्त, और क्या! हम किसी को भी दोस्त कह सकते हैं
----------
· ब्रह्माण्ड के प्रचीनतम् सुपरनोवा की खोज
· ॐ (ब्रह्मनाद) का महत्व

अनिल कान्त : ने कहा…

अच्छी जानकारी दी आपने ...

मेरी कलम - मेरी अभिव्यक्ति

प्रकाश गोविन्द ने कहा…

बहुत बढ़िया जानकारी दी आपने !

आगे भी ऐसी ही पोस्ट की आशा है !

शुभकामनाएँ !!!

आज की आवाज

गौतम राजरिशी ने कहा…

रफ़ी साब का गाया "या हबीबी...मैंने रक्खा है मुहब्बत अपने अफ़साने का नाम’ मुझे बहुत पसंद है...लेकिन कभी हबीबी पे गौर करने की कोशिश नहीं की थी...
शुक्रिया...
यूं ही अरब से परिचय करवाते रहिये

sanjay vyas ने कहा…

कई बार इस शब्द को फ़िल्मी- गैर फ़िल्मी गानों में सुना है, पर इसका अर्थ-भाव इतना व्यापक होगा ये जानकारी कतई नहीं थी. शुक्रिया.

Meenu khare ने कहा…

बड़े दिनों बाद आपके ब्लॉग पर आना हुआ ... सारी पोस्टें एक बार में पढ़ डाली ...एक आत्मीयता सी है आपके लेखन में ...मेरा भी एक साधारण सा ब्लॉग है. कभी आयें तो अच्छा लगेगा
http://meenukhare.blogspot.com/

सुशीला पुरी ने कहा…

पूनम जी ! आज जाकर आकाश को चोंच में पकड़ पाई ......सब पढ़ा , मजेदार है .....हार्दिक बधाई .

cmpershad ने कहा…

" अक्सर अरबी लोग शाम को चार पाँच बजे मिलने पर गुड मार्निंग कहते हैं। "
इसमें आश्चर्य क्यों? शायद आज लोग यह भूल गए हैं कि जब आप पहली बार मिलते हैं तो गुड मार्निंग ही कहा जाता है [यह पहली मुलाकात है और इसका समय या सुबह से कोई तालुक नहीं]। आजकल जब मैं किसी से रात में मिलता हूँ तो वह गुड नाईट कहता है जब कि यह विदा के समय कहा जाता है। यह मात्र सूचनार्थ है:)

दिगम्बर नासवा ने कहा…

YE SACH HAI.....ARAB JAGAT MEIN AISAA HI HOTA HAI..AIK AUR BAAT JO ACHHE LAGTI HAI KI ARAB KE LOG HAR KISI KO AATE JAATE "SALAAM" KAHTE HAIN..... PAR HUM BHAARTIY BAS MILNE JULNE WAALON SE HI "MANASTE" KAHTE HAIN...... HAR KISI KO DEKH KAR NAHI....MUJHE LAGTA HAI KUCH ACHHE BAATE HAIN SEEKHNE KO ARAB JAGAT SE

Rajendra Swarnkar : राजेन्द्र स्वर्णकार ने कहा…




☆★☆★☆

या हबीबी
वाह ! रोचक !

आदरणीया पूर्णिमा जी

अत्यंत सुंदर रोचक जानकारी से भरपूर लघु आलेख लिखा है आपने !
आभार !

हार्दिक मंगलकामनाएं !
-राजेन्द्र स्वर्णकार