शुक्रवार, 16 अक्तूबर 2009

भेंट श्वेताक से

दीपावली के अवसर पर लक्ष्मी के साथ गणेश की पूजा का विधान है। प्रकृति में श्वेत आक ऐसा पौधा है जिसकी जड़ में दस से बारह वर्ष की आयु में गणेश की आकृति का निर्माण होता है। इस साल मुझे श्वेत आक के ऐसे पौधे को देखने का अवसर मिला लेकिन जड़ खोदकर उसकी आकृति देखने के लिए पेड़ का जीवन नष्ट कर देना कोई मानवीयता नहीं सो गणेश जी वहाँ विराजमान हैं या नहीं देखने का अवसर नहीं मिला।

सामान्य रूप से आक का फूल नीला या बैंगनी होता है। हज़ारों नीले बैंगनी फूलों वाले आक के बीच एक श्वेत आक जन्म लेता है इस कारण इसे राजआक या राजा आक भी कहते हैं। यह एक अत्यंत उपयोगी पौधा है जिसका उल्लेख लगभग सभी प्राचीन आयुर्वेदिक ग्रंथों में मिलता है। धनवंतरि निघंटु एवं मदनादि निघंटु में इसकी दो प्रजातियों का उल्लेख किया गया है- आक और राजाक। जबकि भाव प्रकाश में इन दो प्रजातियों के उल्लेख के बाद इसकी एक और प्रजाति रक्ताक का उल्लेख करते हुए उसकी विशेषताओं को गिनाया गया है। राजा निघंटु के लेखक ने भी इस प्रजाति का उल्लेख करते हुए आक के तीन प्रकार आक, श्वेताक और वेताक का नाम लिया है। चरक संहिता में भी इसका उल्लेख मिलता है। अपने औषधीय गुणों के कारण यह पौधा वर्षों से भारतीय औषधिशास्त्र में महत्त्वपूर्ण समझा जाता रहा है। भाव प्रकाश के अनुसार इसका प्रयोग चर्म रोगों, पाचन समस्याओं, पेट के रोगों, ट्यूमरों, जोड़ों के दर्द, घाव और दाँत के दर्द को दूर करने में किया जाता है। इस पेड़ का दूध गंजापन दूर करने और बाल गिरने को रोकनेवाला है। इसके फूल, छाल और जड़ दमे और खाँसी को दूर करने वाले माने गए हैं।

धार्मिक दृष्टि से श्वेत आक को कल्पवृक्ष की तरह वरदायक वृक्ष माना गया है। श्रद्धापूर्वक नतमस्तक होकर इस पौधे से कुछ माँगने पर यह अपनी जान देकर भी माँगने वाले की इच्छा पूरी करता है। यह भी कहा गया है कि इस प्रकार की इच्छा शुद्ध होनी चाहिए। ऐसी आस्था भी है कि इसकी जड़ को पुष्य नक्षत्र में विशेष विधिविधान के साथ आमंत्रित कर जिस घर में स्थापित किया जाता है वहाँ स्थायी रूप से लक्ष्मी का वास बना रहता है और धन धान्य की कमी नहीं रहती। दीपावली के शुभ अवसर पर मेरे सामने खिला यह श्वेत आक सभी पाठकों के लिए मंगलकारी हो इसी शुभकामना के साथ,

10 टिप्‍पणियां:

GATHAREE ने कहा…

gyanwardhak post

ज़ाकिर अली ‘रजनीश’ ने कहा…

दीपपर्व की अशेष शुभकामनाएँ।
आपकी लेखनी से साहित्य जगत जगमगाए।
लक्ष्मी जी आपका बैलेंस, मंहगाई की तरह रोड बढ़ाएँ।

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पर्यावरण और ब्लॉगिंग को भी सुरक्षित बनाएं।

संगीता पुरी ने कहा…

दीपावली के अवसर पर आपने चित्र सहित श्र्वेताक बहुत अच्‍छी जानकारी दी .. आपको भी दीपावली की हार्दिक शुभकामनाएं !!

राकेश खंडेलवाल ने कहा…

जो चषक हाथ धन्वन्तरि के थमा, नीर उसका सदा आप पाते रहें
शारदा के करों में जो वीणा बजी, तान उसकी सदा गुनगुनाते रहें
क्षीर के सिन्धु में रक्त शतदल कमल पर विराजी हुई विष्णु की जो प्रिया
के करों से बिखरते हुए गीत का आप आशीष हर रोज पाते रहें

राकेश

रचना गौड़ ’भारती’ ने कहा…

दीप की ज्योति सा ओज आपके जीवन में बना रहे इस कामना के साथ दीपावली की हार्दिक शुभकामनाएं। आपकी बुद्धि में गणेश की छाया,घर में लक्ष्मी की माया और कलम में सरस्वती का वास रहे।
*Happy Deepavali*

दिगम्बर नासवा ने कहा…

सुन्दर जानकारी .......... मुझे ध्यान है बचपन में चोट लगने पर इसकी पत्ती तोड़ कर जो द्रव्य निकलता है उसको लगाने से घाव जल्दी भरता है और खून भी तुंरत रुक जाता था ...........

Mrs. Asha Joglekar ने कहा…

य़ह श्वेताक शायद आक का ही म्यूटन्ट होगा । पर आपने जो औषधीय उपयोग बताये हैं वे तो सामान्य आक के भी होंगे । अच्छी जानकारी ।

KK Yadav ने कहा…

सुन्दर जानकारी .....शुभकामनाएं!!

Kamlesh Kumar Diwan ने कहा…

आक के पेड़ के बारे मे आपने बहुत कुछ लिख दिया है,धन्यवाद।

योगेन्द्र मौदगिल ने कहा…

बढ़िया जानकारी के लिये साधुवाद...