मंगलवार, 4 अगस्त 2009

टूटे गिटार का ग़म


कहते है शब्द के वार का घाव तलवार से गहरा होता है और संगीत की शक्ति से बुझे दिये जल उठते हैं। कहने की बात नहीं कि अगर ये दोनों साथ हो तो ताकत का ऐसा स्रोत बह सकता है जिससे कुछ भी जीता जा सकता है। जीत कितनी सहज हो सकती है और कितनी कठिन यह कहना आसान नहीं फिर भी इन दोनों ताकतों को साथ लेकर देव कैरोल साहब निकल पड़े हैं व्यवस्था के विरोध में।

देव कैरोल कैनेडा के पॉप गायक हैं और उनका एक छोटा सा पॉप समूह है जिसके साथ वे देश विदेश की यात्रा करते हुए अपने कार्यक्रम प्रस्तुत करते हैं। पिछले साल, ऐसी ही किसी संगीत यात्रा में जब वे यूनाइटेड एअरलाइन के साथ उड़ान भर रहे थे तब यात्रियों के सामान की देखरेख करने वालों की गलती से उनका साढ़े तीन हज़ार कैनेडियन डॉलर का कीमती गिटार टूट गया। देव साहब कहते हैं कि उन्होंने विमान की खिड़की से सामान उठाने वाले कुलियों को गिटार फेंकते हुए देखा। विमान कंपनियाँ आसानी से अपनी गलती नहीं मानतीं। वे हवाई अड्डे के अधिकारियों पर दोष मढ़ती हैं और हवाई अड्डे के अधिकारी माल ढोने वाली कंपनियों पर। इन सबके बीच अलग अलग अधिकारियों से मिलते हुए मुआवज़ा पा लेना किसी मुसीबत से कम नहीं। देव साहब भी इस भाग दौड़ से तंग आगए और उन्होंने इससे निबटने के लिए एक गीत बनाया यूनाइटेड ब्रेक्स गिटार्स। इसका वीडियो बनाकर उन्होंने ६ जुलाई २००९ को वेब पर अपलोड किया तो पहले चार दिनों में ही इस पर दस लाख से ज्यादा हिट लगे। टूटे दिल का संगीत किसे लूट नहीं लेता? मालूम नहीं इस शब्द और संगीत की शक्ति से एअरलाइन के कान पर जूँ रेंगी या नहीं पर देव साहब की लोकप्रियता के नए रेकार्ड ज़रूर कायम हो गए। सुना है देव साहब ने अपना गिटार खुद ही पैसे खर्च कर के मरम्मत करवा लिया है पर उसकी आवाज़ अब वैसी नहीं रही जैसी पहले थी। रहीमदादा कह ही चुके हैं- टूटे फिर से ना जुड़े, जुड़े गाँठ पड़ि जाय।

हवाई यात्रा में वाद्ययंत्रों के टूटने और इससे टूटे दिल द्वारा संगीत रचने की यह पहली घटना नहीं है। इससे पहले एक अमरीकी गायक टॉम पैक्सटन महोदय भी टूटे गिटार के लिए गीत गाकर रिपब्लिक एअरलाइन को गालियाँ दे चुके हैं। दुख की बात है! लेकिन खुशी की बात यह है कि हमारी गालियाँ गाने की खालिस भारतीय परंपरा भी सात समुंदर पार पहुँच गई है और वेब पर परचम लहरा रही है। काश हमने इसे समय रहते पटेंट करवा लिया होता। हम तो सिर्फ होली या विवाह आदि के अवसरों पर गालियाँ गाते हैं जबकि ये लोग हर जगह गा रहे है। यह सब कहानियाँ पढ़ते हुए मुझे अपनी बहन की याद आ रही है जो बीस साल पहले अपने महीने भर के वेतन से खरीदे गए कीमती हारमोनियम को एअरलाइन की हिदायतों के अनुसार तरह तरह से पैक कर के दिल्ली से सैन होज़े के लिए उड़ी और वहाँ पहुँचकर उसे बक्से में हारमोनियम की बजाय हारमोनियम के हज़ार टुकड़े मिले। फ़ोन पर हारमोनियम की बात करते उसकी सिसकियाँ रोके न रुकती थीं। बहना तुमने क्यों न कोई गीत बनाकर वेब पर अपलोड किया?

15 टिप्‍पणियां:

लावण्यम्` ~ अन्तर्मन्` ने कहा…

http://www.lavanyashah.com/2009/08/blog-post.html

Purnima ji ke liye -
- Dekhiyega ye post

Udan Tashtari ने कहा…

ये गम कुछ दिन पहले ही देखा था...बेहतरीन तरीका लगा था शिकायत दर्ज करने का.

Dr. Smt. ajit gupta ने कहा…

भारत तो सम्‍पूर्ण जीवन दर्शन है, किस-किस को पेटेण्‍ट कराइएगा? वहाँ वाद्य-यंत्रों के टूटने पर रो रहे हैं, भारतीयों ने तो असंख्‍य श्‍लोकों को जलते देखा है। लेकिन फिर भी भारत का गीत मरता नहीं। क्‍योंकि हमारी संस्‍कृति में संगीत बसा है, हमने इसे धारण किया है और इसी कारण हम इसे धर्म कहते हैं।

अनूप शुक्ल ने कहा…

अच्छा लिखा आपने। आपको रक्षाबंधन मुबारक!

दिगम्बर नासवा ने कहा…

दिल को छूने वाला लिखा है.............. आप को और सब भाई बहनों को रक्षाबंधन की हार्दिक शुभकामनायें...........

Meenu khare ने कहा…

बेहतरीन अभिव्यक्ति.

पूर्णिमा जी एक कविताओं का एक साधारण सा ब्लॉग मैंने भी शुरू किया है.
कभी यहाँ आयेंगी तो बहुत खुशी होगी .

http://meenukhare.blogspot.com/

सुशीला पुरी ने कहा…

हारमोनियम को धुनों में बदल देने की बात ........वाह पूर्णिमा जी ! सरगम की तरह बजती रहें ......

cmpershad ने कहा…

भारत में गिटार तो क्या दिल भी टूट जाता है ...और वह भी प्रेम में:)

Science Bloggers Association ने कहा…

Dil ko chhu gaya ye andaaz.
-Zakir Ali ‘Rajnish’
{ Secretary-TSALIIM & SBAI }

Vijay Kumar Sappatti ने कहा…

bahut hi accha lekhan poornima ji .. padhkar dil gamjada ho gaya ji


regards

vijay
please read my new poem " झील" on www.poemsofvijay.blogspot.com

अर्शिया अली ने कहा…

Marm sparshee.
{ Treasurer-T & S }

Harkirat Haqeer ने कहा…

बहुत सुंदर.... दिल को छू गया आपका लेख .....!!

गौतम राजरिशी ने कहा…

आखिरी पैरा पढ़ने तक मैं पूरी तरह ग़मग़ीन हो चुका था देव कैरोल साब के दुख में...लेकिन बहना के दुख की प्रस्तुति ने जोर का हँसा दिया..

haidabadi ने कहा…

पूर्णिमा साहिबा
मुलाहिज़ा फरमाएं
धड़कने तेज़ ज़ुबां बंद परेशान दिमाग
शिकस्ता साज़ की तारें हिला गया है कोई

चाँद हदियाबादी
डेनमार्क

JHAROKHA ने कहा…

Adarneeya Poornima Ji,
Bahut achchhaa aur marmsparshee lekh ...apne ek gharelu saman ke tootane par kya beetatee hai ham par ..fir vah to gitar tha..
Poonam