बुधवार, 13 मई 2009

शावरमा


शावरमा अरब दुनिया का समोसा है। हर सड़क पर इसकी एक दूकान ज़रूर होगी। मज़ेदार नाश्ता तो यह है ही, जल्दी हो तो सुबह या शाम का खाना भी इससे निबटाया जा सकता है।

शावरमा दो चीज़ें मिलाकर तैयार होता हैं। खमीरी रोटी जिसे खबूस कहते हैं और मसाला जो खबूस में भरा जाता है। खबूस कुछ कुछ भटूरे जैसी होती है लेकिन यह तली नहीं जाती भट्ठी में सेंकी जाती है। भरावन आमतौर पर ३ तरह की होती है मुर्गे, मीट या फ़िलाफ़िल की। फिलाफिल दाल के पकौड़े होते हैं जो तल कर बनाए जाते हैं और तोड़कर खबूस में भरे जाते हैं। मुर्ग या मीट को मसाले के साथ एक घूमती हुई स्वचालित छड़ी में बिजली के हीटर के सामने रोस्ट किया जाता है। जब बाहरी परत नर्म और सुनहरी हो जाती है तब तलवार जैसी बड़ी छुरी से उसको फ्रेंच फ्राई जैसा काट देते हैं और खबूस की दो परतों के बीच सलाद, तुर्श, ताहिनी और फ्रेंच फ्राई के साथ भर कर रोल बना देते हैं।

ताहिनी, लहसुन की हल्की गंधवाला, स्वाद में रायते जैसा होता है। तुर्श के नाम से ही जान सकते हैं कि यह तीखा और खट्टा होता है जिसे गाजर, हरी मिर्च और चुकंदर में सिरके के साथ नमक और कुटी मिर्च डालकर तैयार किया जाता है। गरम गरम शावरमा के साथ पिया जाता है ठंडा लबान, पर उस विषय में फिर कभी। हाँ बदलते समय के साथ लबान की जगह कोकाकोला लोकप्रिय होने लगा है, साँच को आँच क्या आप खुद ही देख लें।

11 टिप्‍पणियां:

संगीता पुरी ने कहा…

बिल्‍कुल नई जानकारी .. धन्‍यवाद।

VIJAY TIWARI " KISLAY " ने कहा…

पूर्णिमा जी
शावरमा की जानकारी के लिए बधाई.
- विजय

MUMBAI TIGER मुम्बई टाईगर ने कहा…

"शावरमा"
बहुत स्वादिष्टि जी

आभार
मुम्बई टाईगर
हे प्रभु यह तेरापन्थ

Udan Tashtari ने कहा…

हमारा तो पसंदीदा डिश है. :)

creativekona ने कहा…

पूर्णिमा जी ,
शावरमा के बारे में पढ़ कर मुंह में पानी आ गया ..आपकी लेखन शैली ही ऐसी है कि
लगता है वर्णित वास्तु .....सामने है
pata naheen kyon shavarma ka chitra naheen dikh raha hai ?
.शुभकामनायें .
हेमंत कुमार

भूतनाथ ने कहा…

main to banaa nahin paayaa...aapse milunga tab aapke haath kaa hi khaaungaa....!!

JHAROKHA ने कहा…

Adarneeya Poornima ji,
Apne to aaj bahut achchhee dish ke bare men likha hai...main koshish karoongee ise banane kee.apke blog par to har tarah kee jankariyan milatee hain.....
Poonam

राजेश उत्‍साही ने कहा…

पूर्णिमा जी शुक्रिया की आप मेरी गुल्‍लक में आईं। उसमें आपने हाथ डाला,सिक्‍के टटोले उनकी खनक महसूस की । मुझे अच्‍छा लगा। उससे भी अच्‍छा कि आपने मेरा समर्थन किया, हौसला बढ़ाया। गुल्‍लक में आती रहियेगा।

आपकी चोंच का समोसा स्‍वादिष्‍ट है। मैं भी वह खाने आता रहूंगा। उम्‍मीद है चोंच में नई'नई चीजें मिलेंगी ही। आपके दोहे बहुत अच्‍छे हैं। बधाई।

Mrs. Asha Joglekar ने कहा…

वाह, बरसों पहले कुवैत में खाया फिलाफिल की याद दिला दी । अब तोयह अमरीका मे भी मिल जाता है ।

पूर्णिमा वर्मन ने कहा…

मालूम नहीं कुछ लोगों को (या सबको?) शावरमा की फोटो क्यों नहीं दिख रही। फिर से अपलोड की है अब देखें।

David Lobenberg ने कहा…

You are making me very hungry with this photo. Lamb? One of my favorite things to eat!